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अश्लेषा बलि पूजा का क्या महत्व है?
अश्लेषा बलि पूजा हिंदू धर्म में विशेष रूप से दक्षिण भारत, खासकर कर्नाटक और केरल में की जाने वाली एक महत्वपूर्ण धार्मिक पूजा है। यह पूजा मुख्य रूप से नाग देवता (सर्प देवताओं) को समर्पित होती है और इसे अश्लेषा नक्षत्र के दिन किया जाता है।
अश्लेषा बलि पूजा क्यों की जाती है?
अश्लेषा बलि पूजा के मुख्य उद्देश्य:
- ✅ नाग दोष की शांति के लिए
- ✅ संतान प्राप्ति में बाधा दूर करने के लिए
- ✅ विवाह में देरी या दांपत्य जीवन की समस्याओं के समाधान हेतु
- ✅ पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति के लिए
- ✅ पूर्वजों के दोष (पितृ दोष) की शांति के लिए
यह पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाने में सहायक मानी जाती है।
यह पूजा कहाँ की जाती है?
अश्लेषा बलि पूजा मुख्य रूप से दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों में की जाती है, जैसे:
- कुक्के सुब्रमण्य मंदिर
- घटी सुब्रमण्य मंदिर
- मन्नारसला श्री नागराजा मंदिर
इन मंदिरों में नाग देवता की विशेष आराधना की जाती है और हजारों श्रद्धालु इस पूजा में भाग लेते हैं।
पूजा की विधि
अश्लेषा नक्षत्र के दिन प्रातःकाल विशेष मंत्रोच्चार और विधि-विधान से नाग देवता की पूजा की जाती है।
इसमें शामिल होते हैं:
- नाग देवता का अभिषेक
- विशेष हवन और मंत्र जाप
- बलि (प्रतीकात्मक अर्पण)
- पुजारी द्वारा दोष शांति प्रार्थना
पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।
अश्लेषा बलि पूजा से होने वाले लाभ
- जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं
- मानसिक शांति और आत्मबल की वृद्धि
- ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है
- परिवार में सुख-समृद्धि आती है

